वे पांच लम्हे जब हरभजन 'सिंह' ने बताया कौन है असली 'किंग'

09:05 PM Dec 24, 2021 |
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भारतीय क्रिकेट के सबसे दिग्गज ऑफ स्पिनर्स में से एक हरभजन सिंह ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है. शुक्रवार, 24 दिसंबर को हरभजन ने एक ट्वीट के जरिए अपने 23 साल लम्बे क्रिकेटिंग करियर को समाप्त करने की सूचना दी. हरभजन का क्रिकेटिंग करियर काफी उल्लेखनीय रहा. उन्होंने अपने इस सफर में अनगिनत उपलब्धियां हासिल कीं.
सौ से ज्यादा टेस्ट, दो सौ से ज्यादा वनडे, 28 इंटरनेशनल T20 मैच और डेढ़ सौ से भी ज्यादा IPL मैच. हरभजन भारत के लिए सौ से ज्यादा टेस्ट मैच खेलने वाले दूसरे स्पिनर और ओवरऑल तीसरे भारतीय गेंदबाज़ रहे. भज्जी ने 103 टेस्ट मैच में 417 विकेट झटके हैं. भारत के लिए उनसे ज्यादा टेस्ट विकेट सिर्फ अनिल कुंबले, कपिल देव और रविचंद्रन अश्विन ने लिए हैं. भज्जी ने 236 वनडे मैच में 269 विकेट भी लिए हैं.
भज्जी ना सिर्फ मैच बल्कि सीरीज दर सीरीज अच्छा प्रदर्शन करने के लिए याद किए जाएंगे. ऐसे में हमने सोचा कि क्यों ना उनकी पांच बेस्ट सीरीज के बारे में आपको बताया जाए.

# India vs Australia 2000/2001

और ऐसी किसी भी चर्चा की शुरुआत के लिए इस सीरीज से बेहतर क्या हो सकता है. हरभजन सिंह के करियर में जब भी टर्निंग पॉइंट का ज़िक्र होगा, तो सबसे पहले इस सीरीज का नाम आएगा. साल 1998 में डेब्यू करने के बाद हरभजन अगले दो साल तक कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए थे. टीम में उनकी जगह को लेकर भी सवाल उठ रहे थे. लेकिन कप्तान सौरव गांगुली के भरोसे के चलते उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस होम सीरीज के लिए चुना गया. हरभजन ने अपने कप्तान के फैसले को सही साबित किया और अकेले ही पूरी सीरीज लूट ली.
हरभजन ने तीन मैचों की इस सीरीज में अविश्वसनीय 32 विकेट निकाले. भज्जी ने पहले मैच में चार, दूसरे में 13 और आखिरी मैच में 15 विकेट लिए. इस सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग भज्जी से पार ही नहीं पा पाए. वे पांच बार भज्जी के सामने आए और पांचों बार उनका शिकार बने. इसके अलावा भज्जी ने एडम गिलक्रिस्ट, मैथ्यू हेडन, मार्क वॉ और जस्टिन लैंगर जैसे खिलाड़ियों को भी कई बार आउट किया.

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हरभजन सिंह (गेटी फोटो)

भारत के लिए इस सीरीज में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ रहे सचिन रमेश तेंडुलकर. उन्होंने इस सीरीज में कुल तीन विकेट निकाले थे. इसके अलावा ज़हीर खान ने तीन, अजित आगरकर और जवागल श्रीनाथ ने दो-दो विकेट निकाले थे. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हरभजन का इस सीरीज की जीत में कितना बड़ा और अहम योगदान था. भारत ने ये सीरीज पहला टेस्ट हारने के बाद 2-1 से जीती थी और भज्जी, बिना किसी शंका के मैन ऑफ द सीरीज बने थे.

# India vs West Indies 2002

साल 2002 में वेस्ट इंडीज़ की टीम तीन टेस्ट मैच के लिए भारत के दौरे पर थी. हरभजन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिखाई अपनी लाजवाब फॉर्म इस सीरीज में भी जारी रखी. इस सीरीज में भी वे भारत के लीडिंग विकेट टेकर रहे. हरभजन ने इस सीरीज की महज़ चार पारियों में ही 20 विकेट निकाल डाले. इतने विकेट लेने के साथ भज्जी ने इस सीरीज में 69 रन भी बनाए.
वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ भज्जी ने दो फाइव-विकेट हॉल भी लिए. एक सीरीज के पहले मैच में, जिसे भारतीय टीम ने एक पारी और 112 रन के बड़े मार्जिन से जीता था. और दूसरा फाइव-विकेट हॉल आया सीरीज के तीसरे मैच में, जो ड्रॉ पर समाप्त हुआ. इसके अलावा भज्जी ने दूसरे टेस्ट मैच में भी अच्छा प्रदर्शन किया था और सात विकेट निकाले थे. जिसमे पहली पारी में तीन और दूसरी पारी में चार विकेट आए थे. इस मैच को भारत ने आठ विकेट से जीता था.


हरभजन सिंह (गेटी फोटो)

# India vs South Africa 2008

साल 2008 में हरभजन के लिए एक और ब्रेक-थ्रू सीरीज आई. साउथ अफ्रीका की टीम ग्रेम स्मिथ की कप्तानी में तीन टेस्ट मैच खेलने भारत आई हुई थी. भारतीय टीम की अगुवाई लेग स्पिनर अनिल कुंबले कर रहे थे. हरभजन ने इस सीरीज में भी अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाज़ी का लोहा मनवाया. लेकिन कप्तान कुंबले और बाकी भारतीय गेंदबाज़ों के खराब प्रदर्शन के चलते भारतीय टीम को इस सीरीज में ड्रॉ से ही संतोष करना पड़ा. 1-1 से ड्रॉ रही इस सीरीज के मैन ऑफ द टूर्नामेंट भज्जी रहे थे.
भज्जी ने इस सीरीज की पांच पारियों में 19 विकेट निकाले. सीरीज के पहले मैच में उन्होंने कुल आठ विकेट निकाले जिसकी पहली पारी में उनके नाम एक फाइव-विकेट हॉल भी रहा. हालांकि यह टेस्ट ड्रॉ पर छूटा. दूसरे टेस्ट मैच में साउथ अफ्रीका ने भारत को एक पारी और 90 रन से करारी मात दी. भज्जी ने इस मैच में चार विकेट लिए. सीरीज के आखिरी मैच में भज्जी ने सात विकेट निकाले और भारतीय टीम की आठ विकेट की जीत में अहम भूमिका निभाई.


हरभजन सिंह (गेटी फोटो)

इस सीरीज में भारत के लिए दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ विरेंदर सहवाग रहे. सहवाग ने सीरीज में कुल छह विकेट निकाले. इसके अलावा ईशांत शर्मा ने पांच, कप्तान कुंबले और एस श्रीसंथ ने चार-चार जबकि पीयूष चावला ने दो विकेट निकाले. 2001 की ऑस्ट्रेलिया सीरीज की तरह ही इस सीरीज में भी भज्जी ने भारतीय गेंदबाज़ी को एकतरफा संभाला.

# India vs New Zealand 2010/11

फिर आई वह सीरीज जिसमे भज्जी का एक अलग ही रूप देखने को मिला. भज्जी की फिरकी का जादू देख चुकी पूरी दुनिया इस बार उनके बल्ले का कमाल देखने वाली थी. साल 2010 में न्यूज़ीलैंड की टीम डैनिएल वेटोरी की कप्तानी में तीन टेस्ट मैच खेलने भारत के दौरे पर थी. भारतीय टीम की कमान महेंद्र सिंह धोनी संभाल रहे थे.
भज्जी ने इस सीरीज की पांच पारियों में 10 विकेट तो निकाले ही, साथ ही चार पारियों में बल्लेबाजी करते हुए 105 के औसत और दो शतकों के साथ 315 रन भी बनाए. भज्जी ने सीरीज के पहले मैच में 69 और 115 रन की पारियां खेलीं. अगले टेस्ट में भज्जी के बल्ले से फिर एक शतक निकला. इस बार नाबाद 111. भज्जी इस सीरीज में विरेंदर सहवाग और राहुल द्रविड़ के बाद तीसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज़ थे. इसके अलावा वे प्रज्ञान ओझा के बाद दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज़ भी रहे थे.


हरभजन सिंह (गेटी फोटो)

# South Africa vs India 2010/11

न्यूज़ीलैंड के बाद बारी आई अफ्रीका दौरे की. इस बार भारतीय टीम धोनी की कप्तानी में साउथ अफ्रीका गई थी. अफ्रीकी टीम की कमान संभाल रहे थे ग्रेम स्मिथ. भारतीय टीम ने इस सीरीज में एक टेस्ट जीता और एक ड्रॉ करवाया. सीरीज के पहले मैच में ही भारतीय टीम को एक पारी और 25 रन से हार का सामना करना पड़ा. भज्जी इस मैच में सिर्फ दो ही विकेट ले सके.
अगले ही मैच में भारतीय टीम ने पलटवार किया. जिसका जिम्मा संभाला वीवीएस लक्ष्मण और हरभजन सिंह ने. एक लो स्कोरिंग मैच में लक्ष्मण ने 96 और 38 रन की पारियां खेलीं तो भज्जी ने भी मैच में छह विकेट झटके और महत्वपूर्ण 25 रन बनाए. भज्जी ने इस सीरीज में भारत के लिए सबसे ज्यादा 15 विकेट चटकाए. इसके अलावा उन्होंने बल्लेबाज़ी में काफी अच्छा प्रदर्शन किया और सीरीज में 93 रन बनाए. भारत और अफ्रीका के बीच हुई यह सीरीज ड्रॉ पर समाप्त हुई जिसमें एक बार फिर भारतीय गेंदबाज़ी को लीड किया हरभजन सिंह ने.

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