टैक्सचोरी के केस में फंसी चीनी मोबाइल कंपनियां इंडिया से भाग रही हैं? इस देश ने दिया न्यौता!

03:47 PM Sep 19, 2022 | प्रदीप यादव
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की मोबाइल फोन कंपनियां (Chinese Mobile Firms) बढ़ती कार्रवाई के चलते दूसरे देशों में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए भारत छोड़ सकती हैं. ऐसे में आने वाले समय में भारत में सस्ते चाइनीज मोबाइल फोन की किल्लत हो सकती है.

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ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बात करें तो एक चीनी अधिकारी ने दावा किया  है कि चीनी स्मार्टफोन कंपनियां अब भारत से अपनी यूनिट बंद कर इंडोनेशिया, बांग्लादेश और नाइजीरिया शिफ्ट होने की पूरी तैयारी में लगी हैं. इस रिपोर्ट में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी ओप्पो द्वारा हाल ही में मिस्र सरकार के साथ 20 मिलियन डॉलर (करीब 159 करोड़ रुपये) के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए एक सौदे का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सौदा भारत से चीनी कंपनियों के पलायन की शुरुआती वजह बन सकता है.मोबाइल कंपनियों से जुड़े अधिकारियों ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि 159 करोड़ रुपये कीमत के स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की सुविधा स्थापित करने के लिए मिस्र सरकार के साथ ओप्पो का समझौता एक दूरगामी कदम हो सकता है. 

बता दें कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में चीनी मोबाइल कंपनियों पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. भारत सरकार की तरफ से तीन चीनी मोबाइल कंपनियों मसलन ओप्पो, वीवो इंडिया और शाओमी द्वारा कथित कर चोरी के मामलों की जांच की जा रही है. इस दौरान राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने कंपनियों को ड्यूटी चोरी के लिए नोटिस जारी किया था. भारत ने टेंसेंट के वी चैट और बाइट डांस कंपनी के टिक टॉक प्लेटफार्म सहित 300 से अधिक चीनी ऐप्स पर भी प्रतिबंध लगा रखा है.

वहीं सरकार अपने घरेलू स्मार्टफोन और चिप निर्माण क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है. सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए 1.54 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखते हुए गुजरात सरकार ने वेदांता और फॉक्सकॉन के साथ साझेदारी की है. साथ ही ख़बर ये भी है कि टाटा समूह कथित तौर पर देश में आईफोन बनाने के काम को 500 फीसदी तक बढ़ाने के लिए ताइवान स्थित विस्ट्रॉन के साथ बातचीत कर रहा है.


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