क्या चीन में शी जिनपिंग कुर्सी बचाने के लिए मंत्रियों को ठिकाने लगा रहे हैं?

08:33 PM Sep 23, 2022 | अभिषेक
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जिस मंत्री को करप्शन रोकने की ज़िम्मेदारी दी गई थी, वो करप्शन के मामले में मौत की सज़ा झेल रहा है.
21 सितंबर को चीन की एक अदालत ने पूर्व न्याय मंत्री फ़ु ज़ेंगहुआ को दो साल के सस्पेंडेड डेथ सेंटेंस की सज़ा सुनाई. इसका क्या मतलब है? दरअसल, ज़ेंगहुआ दो साल तक प्रोबेशन पीरियड में रहेंगे. अगर अदालत को लगा कि ये आदमी ख़तरनाक है, इसका ज़िंदा रहना नुकसानदेह है तो उसे तुरंत फांसी पर चढ़ाया जा सकता है. अगर दो साल तक अदालत को ऐसा नहीं लगा तो उसकी सज़ा आजीवन कारावास में बदल जाएगी. यानी, फ़ु जेंगहुआ दो बरस तक खौफ़ और आशंका के साये में जिएंगे. अगर वो जीवित बचे रह गए तो बाकी की ज़िंदगी जेल की सलाखों के पीछे गुजरेगी.

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ज़ेंगहुआ इस कद के और इस तरह की सज़ा पाने वाले पहले या इकलौते व्यक्ति नहीं हैं. चीन में पूर्व मंत्रियों, बड़े सरकारी अधिकारियों, सुपरस्टार्स को जेल भेजने की घटनाएं आम हैं. चीन की सरकार और मीडिया इसको ज़ीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की तरह पेश करती है, लेकिन आलोचक कुछ और मानते हैं. उनका दावा है कि सरकार चुनिंदा लोगों को निशाना बनाती है. ताकि उनकी मुख़ालफ़त की दबी चाह रखनेवालों को संदेश दिया जा सके. संदेश ये कि हमारे पीछे चलो या तुम्हें किनारे लगा दिया जाएगा. कहा तो ये भी जाता है कि मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में ये पैटर्न बढ़ा है.

तो, आज हम समझेंगे,

- चीन में मंत्रियों और अधिकारियों को सज़ा के पीछे की पूरी कहानी क्या है?
- ऐसा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए किया जाता है या सत्ताधीश को मज़बूत बनाने के लिए?
- और, सुनाएंगे कुछ रोचक कहानियां, जब चीन में ताक़तवर लोगों को किनारे कर नज़ीर पेश की गई.

शी जिनपिंग नवंबर 2012 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना (CCP) के जनरल-सेक्रेटरी चुने गए. अक्टूबर 1949 से चीन की सत्ता पर CCP का क़ब्ज़ा है. चीन में एकदलीय व्यवस्था है. एक ही पार्टी है, CCP. वही सब डिसाइड करती है. 1989 के बाद से CCP का जनरल-सेक्रटरी चीन का सबसे ताक़तवर नेता होता है. इस लिहाज से जिनपिंग के पास सत्ता की चाबी थी. उस दौर में पार्टी के भविष्य को लेकर एक आशंका हावी होने लगी थी. वो ये कि पार्टी के अंदर भाई-भतीजावाद बढ़ रहा है. ये लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हो चुके हैं. उनके मुंह में सत्ता का स्वाद लग चुका है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो CCP को बर्बाद होने से कोई नहीं बचा पाएगा. पार्टी के बड़े नेता 1990 के दशक से ये चिंता जता रहे थे. 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिंताओ ने भी ऐसी ही चेतावनी दी थी.

जिनपिंग इससे भली-भांति परिचित थे. बतौर जनरल-सेक्रेटरी, जिनपिंग ने पहला भाषण नवंबर 2012 में दिया. इसमें उन्होंने कहा था,

“ये एक अटल सत्य है कि अगर भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाई गई तो पार्टी और स्टेट का समूल नाश हो जाएगा. हमें सजग रहना होगा.”

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 

जनवरी 2013 में उनका एक और संबोधन चर्चा में आया. इसमें उन्होंने वादा किया कि बड़ी और छोटी मछलियों से एक साथ निपटेंगे. उनका इशारा पार्टी के ताक़तवर नेताओं और लोकल लेवल पर काम करने वाले छोटे अधिकारियों से था.

मार्च 2013 में शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति बन गए. अब पार्टी के साथ-साथ सरकार की कमान भी उनके हाथों में थी. कुछ समय बाद ही एंटी-करप्शन कैंपेन लॉन्च किया गया. सेंट्रल इंस्पेक्शन टीम के अधिकारियों को प्रांतों में भेजा गया. उन्होंने वहां स्थानीय अधिकारियों की जांच की. जो दोषी मिले, उन्हें पद से बर्खास्त किया गया. ऐसे लोगों पर मुकदमा चला और उन्हें जेल भी भेजा गया.

इसके बाद कैंपेन का मुख बड़ी मछलियों की तरफ़ मुड़ा. इसका पहला निशाना बने, चाऊ योनकांग. चाऊ CCP के पोलित ब्यूरो के सदस्य थे और नेशनल सिक्योरिटी चीफ़ के तौर पर काम कर चुके थे. पोलित ब्यूरो में कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे दिग्गज नेताओं को रखा जाता है. 2013 में एक दिन चुपके से उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया गया. फिर उनके ऊपर जांच बिठाई गई. फिर बंद दरवाज़े के अंदर मुकदमा चला. जून 2015 में अदालत ने चाऊ को जीवनभर के लिए जेल भेज दिया. उनकी और उनके पूरे परिवार की संपत्ति ज़ब्त कर ली गई. पार्टी के जिन अधिकारियों पर उनका प्रभाव था, उनके ऊपर भी कार्रवाई हुई. चाऊ योनकांग आज भी जेल में है. वो 1949 के बाद के चीन में इतनी कड़ी सज़ा पाने वाले सबसे प्रभावशाली शख़्स थे. इस घटना से ये सबक गया कि अगर चाऊ पर शिकंजा कस सकता है तो कोई भी सुरक्षित नहीं है.

चीन में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच की ज़िम्मेदारी सेंट्रल कमिटी फ़ॉर डिसिप्लिन इंसपेक्शन (CCDI) और नेशनल सुपरविजन कमिशन (NSC) के पास है. CCDI केंद्र और प्रांत के स्तर पर पार्टी के भीतर के भ्रष्टाचार की जांच करती है. शी जिनपिंग के कार्यकाल में लगभग 40 लाख पार्टी वर्कर्स और पांच सौ से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है. CCDI एक टीवी शो भी प्रड्यूस करती है. इसमें कमिटी का काम दिखाया जाता है.

जिनपिंग के कार्यकाल की शुरुआत में पार्टी वर्कर्स के लिए एक एजुकेशन प्रोग्राम भी लॉन्च किया गया. इसमें ये सिखाया जाता कि पब्लिक में कैसा व्यवहार करना है, कैसे साफ़ और सुघड़ ज़िंदगी जीनी है, कैसे नैतिकता का पालन करना है, आदि. ये पूरा प्रोग्राम राष्ट्रपति जिनपिंग के दिशा-निर्देश पर तैयार हुआ था. जाहिराना तौर पर, इसमें उनके अपने निजी विचार भी शामिल थे.

फिर आया साल 2018. बतौर राष्ट्रपति, जिनपिंग का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ा दिया. 2018 में ही NSC की स्थापना की गई. इसके बाद एंटी-करप्शन कैंपेन का दायरा और विस्तृत हुआ. सरकार ने भगोड़ों की लिस्ट जारी की. कईयों को बाहर से पकड़कर लाया गया और फिर उनके ऊपर मुकदमा चलाया गया. NSC की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से 2020 के बीच लगभग चार हज़ार भगोड़ों को विदेश से अरेस्ट कर लाया गया और उनसे अरबों रुपये की रकम ज़ब्त की गई.
इन सबके अलावा, टेक और एंटरटेनमेंट सेक्टर के कई दिग्गजों को अलग-अलग आरोपों में जेल भेजा जा चुका है. इन मामलों में एक पैटर्न ये दिखता है कि ये सभी अपने-अपने सेक्टर में तेज़ी से पनपने लगे थे.

आज हम ये कहानी क्यों सुना रहे हैं?

दरअसल, दिग्गज अधिकारियों पर अदालती चाबुक की एक और कहानी सामने आ रही है. 21 और 23 सितंबर को दो पूर्व मंत्रियों को मौत की सज़ा सुनाई गई है. 21 सितंबर को पूर्व न्याय मंत्री फ़ु ज़ेंगहुआ और 23 सितंबर को पूर्व डिप्टी सिक्योरिटी मिनिस्टर सन लिजुन को सज़ा दी गई. दोनों के ऊपर अपने लोगों को फायदा पहुंचाने और घूसखोरी का आरोप था. ज़ेंगहुआ और लिजुन ने अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया था. सज़ा के बाद उनकी सारी संपत्ति ज़ब्त कर ली जाएगी. उन्हें कभी पैरोल नहीं मिलेगी. और, वे कभी भी पार्टी में किसी पद पर नहीं रह पाएंगे. लिजुन को जिनपिंग के प्रति अनादर दिखाने के लिए पार्टी से बर्खास्त किया गया था. हालांकि, उन्हें सज़ा भ्रष्टाचार के मामले में मिली है.

इससे सवाल खड़ा होता है कि क्या भ्रष्टाचार-विरोधी कैंपेन की आड़ में जिनपिंग को अजेय बनाने की कोशिश चल रही है?
इस धारणा को बल मिलता है कुछ समय बाद होने वाली नेशनल कांग्रेस की बैठक से. CCP हर पांच साल में नेशनल कांग्रेस की बैठक बुलाती है. इसमें पार्टी और देश के भविष्य पर चर्चा होती है. इसके अलावा, लीडरशिप से जुड़े बड़े फ़ैसले भी लिए जाते हैं. अभी तक ये परंपरा रही है कि 68 साल से ऊपर के लोगों को पार्टी में प्रमोशन नहीं मिलता था. मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग 69 बरस के हो चुके हैं. जबकि बतौर राष्ट्रपति उनका कार्यकाल 2023 में खत्म हो रहा है. उस समय तक वो 70 बरस के हो जाएंगे. कायदे से उन्हें पद से रिटायर हो जाना चाहिए. लेकिन उन्होंने अपने लिए आजीवन पद पर बने रहने का रास्ता साफ़ कर लिया है. पार्टी का एक धड़ा इस चाह के विरोध में है.
जानकारों का कहना है कि जिनपिंग वरिष्ठ लोगों को सज़ा देकर संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं. हमसे वफ़ादारी नहीं निभाई तो अंजाम बुरा होगा. क्या जिनपिंग अपनी कोशिश में सफ़ल हो पाएंगे, ये देखने वाली बात होगी.

अब कुछ पुराने चैप्टर पलट लेते हैं. चीन में बड़े अधिकारियों और मंत्रियों को सज़ा देने का लंबा इतिहास रहा है.

- पहला केस है चीन के पूर्व रेलमंत्री लियु ज़िजुन का. साल 2013 का था. शी जिनपिंग ने नई-नई चीन की सत्ता संभाली थी. उसी साल अदालत ने पूर्व लियु ज़िजुन को मौत की सज़ा सुनाई. आरोप लगे कि वो भ्रष्टाचार में लिप्त थे और उन्होंने बतौर रेलमंत्री रहते हुए सत्ता का दुरुपयोग किया. रिश्वत लेकर सरकारी रेल के ठेके दिलवाए. इस रिश्वत से लियु ने महज़ 25 साल में 80 करोड़ रुपयों से भी ज़्यादा कमाए. आरोप लगने से पहले ही उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था. उनकी जांच ऐसे समय में हुई थी, जब चीन में लगातार रेल दुर्घटनाएं हो रहीं थी.

- दूसरा मामला कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता से जुड़ा है. चीन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में एक प्रांत पड़ता है, ‘युन्नान’. वहां कम्युनिस्ट पार्टी के हेड हुआ करते थे, बाई एनपेई. वो 2011 तक युन्नान में पार्टी का काम संभालते रहे. फिर उनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. कहा गया कि उन्होंने भरपूर रिश्वत ली है. इससे उन्होंने 247 मिलियन युआन माने 3 अरब रुपयों से भी ज़्यादा कमाए हैं. जिसका कोई हिसाब किताब नहीं मिलता है. उनके ऊपर केस चला, अक्टूबर 2016 में उन्हें इस जुर्म के लिए सज़ा-ए-मौत सुना दी गई. लेकिन बाद में ये सज़ा बदलकर आजीवन कारावास कर दी गई थी.  

- तीसरा मामला है जनरल गुओ बॉक्सिओंग का. अप्रैल 2015 में जनरल गुओ बॉक्सिओंग की जांच शुरू की. वो सेन्ट्रल मिलिट्री कमीशन माने (CMC) के वाइस चेयरपर्सन थे. CMC चीन के रक्षा मामलों में सबसे बड़ा संगठन है. ये एक तरीके से चीन की सेना माने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को चलाती है. गुओ की जांच बंद दरवाज़े के पीछे, चुपके-चुपके शुरू हुई. ताकि कोई जानकारी बाहर न आ सके. गुओ पर रिश्वत लेने के आरोप लगे थे. जुलाई 2016 में ख़बर आई कि गुओ ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और सजा के खिलाफ अपील भी नहीं की है. उसके बाद उनकी संपत्तियां ज़ब्त कर लीं गई और उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई.

- चौथा किस्सा है, एक बैंकर का. नाम, ग्यू गुओमिंग. वो इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना में काम किया करते थे. 2019 के बाद से चीनी सरकार बैंकिंग क्षेत्र में होने वाले हेर-फेर को रोकने के लिए कैंपेन चलाया. गुओमिंग पर आरोप लगे कि उन्होंने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है. केस चला, 2021 में उन्हें दोषी पाया गया. अदालत ने माना कि गुओमिंग ने ग़लत ढंग से लोन और निवेश प्राप्त करने में मदद की थी. उन्होंने इसके लिए कई लोगों से रिश्वत भी ली है और 170 करोड़ रुपयों से भी ज़्यादा की काली कमाई की है जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं मिला है. गुओमिंग ने अपना गुनाह कबूल लिया. उन्हें उम्रक़ैद की सज़ा दी गई.


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