दुनिया की सबसे बड़ी पॉलिटिकल बैठक में मोदी की तारीफ़ क्यों हुई?

07:38 PM Sep 21, 2022 | अभिषेक
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> “A Government can never feel defeated when the people speak.
जनता की आवाज़ से किसी सरकार को पराजित महसूस नहीं करना चाहिए.”

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> “दुनिया की चुनौतियां लगातार बढ़ रहीं है. लेकिन मुझे उम्मीद है कि हम साथ मिलकर कोई रास्ता निकाल लेंगे.”

> “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युद्ध के बारे में व्लादिमीर पुतिन से जो कहा, वो बिलकुल सही था.”

ये कुछ बयान 20 सितंबर को शुरू हुई यूनाइटेड नेशनल जनरल असेंबली (UNGA) की बैठक का हासिल हैं. जनरल असेंबली यूएन का सबसे बड़ा अंग है. इसमें यूएन के सभी सदस्य देश शामिल होते हैं. इस लिहाज से न्यू यॉर्क में चल रही UNGA मीटिंग को ‘दुनिया का सबसे बड़ा राजनैतिक जमावड़ा’ भी कहा जा सकता है.

तो, आज हम समझेंगे,

- यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली (UNGA) की पूरी कहानी क्या है?
- UNGA से दुनिया पर कितना फ़र्क़ पड़ता है?
- और, UNGA समिट के पहले दिन क्या निकला?

UNGA क्या है?

ये यूनाइटेड नेशंस का एक स्थायी अंग है. दरअसल, पहले विश्वयुद्ध के बाद बने ‘लीग ऑफ़ नेशंस’ की उपयोगिता खत्म हो चुकी थी. लीग ऑफ़ नेशंस दूसरा विश्वयुद्ध रोकने में असफ़ल रहा था. दूसरे विश्वयुद्ध के बीच में ही एक नए संगठन पर चर्चा शुरू हो चुकी थी. एक ऐसा संगठन, जिसमें सभी देशों का प्रतिनिधित्व हो. और, जो दुनिया में शांति स्थापित करने में कारगर हो. यूएन का विचार सोवियत लीडर जोसेफ़ स्टालिन ने दिया था. जबकि ‘यूनाइटेड नेशंस’ फ़्रेज का पहला इस्तेमाल अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन डी. रुजवेल्ट ने किया था.

अप्रैल से जून 1945 के बीच सैन फ़्रैंसिस्को में 50 देशों के नेताओं ने मिलकर यूएन चार्टर बनाया. फिर 24 अक्टूबर 1945 को औपचारिक तौर पर यूएन की स्थापना हो गई.

यूएन के सामने दुनियाभर की चुनौतियां थी. एक अकेला संगठन एक साथ सबके ऊपर काम नहीं कर सकता था. इसके लिए भूमिकाओं का बंटवारा ज़रूरी था. इसको ध्यान में रखते हुए यूएन के मातहत छह संस्थाएं बनाईं गई. इन्हें यूएन का स्थायी अंग भी कहा जाता है. ये हैं -

जनरल असेंबली

सिक्योरिटी काउंसिल

इकोनॉमिक एंड सोशल काउंसिल

ट्रस्टीशिप काउंसिल

इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस

और, यूएन सेक्रेटेरिएट.

इन सबमें जनरल असेंबली का काम सबसे विस्तृत और सबसे अहम है. यूएन के सभी 193 सदस्य देश जनरल असेंबली का भी हिस्सा होते हैं. यानी, जनरल असेंबली यूएन की इकलौती ऐसी इकाई है, जिसमें सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है. फ़िलिस्तीन और वेटिकन सिटी को ऑब्जर्वर स्टेट्स का दर्ज़ा मिला हुआ है. वे असेंबली की मीटिंग्स में बोल तो सकते हैं, लेकिन किसी प्रस्ताव पर वोट नहीं कर सकते.

UNGA का काम क्या है?

यूनाइटेड नेशनल जनरल असेंबली 

यूएन चार्टर के मुताबिक,

- जनरल असेंबली अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सहयोग और सलाह दे सकती है.
- ये अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े किसी ऐसे सवाल पर चर्चा कर सकती है, जो सिक्योरिटी काउंसिल में विचाराधीन नहीं है.
-.अगर यूएन के किसी अंग के काम और शक्तियों पर असर पड़ रहा हो, तब जनरल असेंबली उसपर चर्चा कर सलाह दे सकती है.
- जनरल असेंबली कुछ और भी ज़रूरी मुद्दों पर अपनी बात रख सकती है.

मसलन,

अंतरराष्ट्रीय राजनैतिक सहयोग. अंतरराष्ट्रीय कानून का विकास और उसको नियमबद्ध करना. समाज, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, मानवतावाद के क्षेत्र में साझा प्रयास.

- जनरल असेंबली देशों के बीच झगड़े की स्थिति में शांतिपूर्ण समझौते की राय दे सकती है.

- यूएन के बजट पर अप्रूवल जनरल असेंबली से ही मिलता है.

- यूएन ने दुनिया के कई हिंसाग्रस्त इलाकों में अपनी पीसकीपिंग सेना उतारी हुई है. इसका खर्चा यूएन के सभी सदस्य देश उठाते हैं. जनरल असेंबली सदस्य देशों की आर्थिक स्थिति का आकलन करती है. फिर उस हिसाब से खर्च का बंटवारा किया जाता है. अमीर देशों को ज़्यादा खर्च उठाना होता है.

- इसके अलावा, जनरल असेंबली सिक्योरिटी काउंसिल के दस अस्थायी सदस्यों का चुनाव करती है, यूएन के दूसरे अंगों के सदस्यों को चुनती है और सिक्योरिटी काउंसिल की सलाह पर सेक्रेटरी-जनरल की नियुक्ति करती है.

UNGA में हर सदस्य के पास एक वोट होता है. सबके वोट बराबर होते हैं. आम मुद्दों पर प्रस्ताव पास कराने के लिए सिंपल मेजॉरिटी की ज़रूरत होती है.
अगर प्रस्ताव शांति और सुरक्षा, बजट या नए सदस्य की एंट्री से जुड़ा हो, तब दो-तिहाई वोट्स मिलने के बाद ही प्रस्ताव पास होता है.

अगर सिक्योरिटी काउंसिल में वीटो के कारण कोई ज़रूरी प्रस्ताव फ़ेल हो जाता है, वैसी स्थिति में जनरल असेंबली उस मसले पर बहस करती है और संबंधित देशों से शांति बनाए रखने की अपील करती है.

कोई भी देश UNGA में पारित प्रस्ताव को मानने के लिए बाध्य नहीं है. फिर भी इसने 77 साल के इतिहास में दुनिया में कई बदलावों की इबारत रखी है. सदस्य देश अपने हित के अनुसार प्रस्तावों की व्याख्या करते हैं. हालांकि, उन्होंने पर्यावरण, आतंकवाद, निरस्त्रीकरण, गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर साथ मिलकर काम किया है. इससे करोड़ों लोगों का जीवन बदला है.

अब जानते हैं कि, UNGA की हाई-लेवल डिबेट क्या है?

UNGA की बैठकें पूरे साल चलती रहतीं है. सितंबर महीने में जनरल डिबेट होती है. शुरुआत में ये डिबेट्स न्यू यॉर्क, लंदन और पेरिस में हुईं थी. 1952 के बाद से इन डिबेट्स की मेज़बानी न्यू यॉर्क में ही हो रही है. इस बहस में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का संबोधन होता है. आमतौर पर सदस्य देशों के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति ही इसमें हिस्सा लेते हैं. लेकिन कभी-कभार किन्हीं कारणों से ये ज़िम्मेदारी कैबिनेट के दूसरे मंत्रियों को सौंपी जाती है. मसलन, इस बार के सेशन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं जा रहे हैं. रूस ने अपने विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव को भेजा है. चीन की तरफ़ से विदेशमंत्री वांग यी हिस्सा ले रहे हैं. जबकि भारत का प्रतिनिधित्व विदेशमंत्री एस. जयशंकर करेंगे. भारत के बोलने का मौका 24 सितंबर को आएगा. जयशंकर 18 सितंबर से ही न्यू यॉर्क में हैं. वो यूएन में संबोधन देने के अलावा 50 से अधिक बैठकों में भी हिस्सा लेने वाले हैं.

इस बार की UNGA डिबेट का एजेंडा क्या है?

इस साल के UNGA सेशन का थीम है - अ वॉटरशेड मोमेंट: ट्रांसफ़ॉर्मेटिव  सॉल्युशंस टू इंटरलॉकिंग चैलेंजेज.
इस समय दुनिया एकसाथ कई समस्याओं से जूझ रही है. ये समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ीं हुईं है.
मसलन, कई देशों में क्लाइमेट चेंज का प्रभाव सामने आया है. पाकिस्तान में बाढ़ आई हुई है. जापान ने अभी-अभी तूफान का दंश झेला है. ताइवान में भूकंप आया था. यूरोप और चीन के कई हिस्सों में सूखा पड़ा है.

दूसरी बात, रूस-यूक्रेन युद्ध के सात महीने हो चुके हैं. दोनों ही देश खाद्यान्न और फ़र्टिलाइज़र्स के सबसे बड़े निर्यातकों में से हैं. युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. इससे अफ़्रीका के कई देशों में खाने का संकट पैदा हुआ है. आने वाले समय में उपज घटने की आशंका भी जताई जा रही है. जनरल असेंबली में ये मुद्दा भी छाया रहेगा.

इस बार भारत का फ़ोकस किन मुद्दों पर रहेगा?

18 सितंबर को यूएन में भारत के परमानेंट मिशन के ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो रिलीज़ हुआ. इसमें कहा गया कि भारत का फ़ोकस फ़ाइव-एस पर होगा. क्या-क्या? सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति और समृद्धि.

जानकारों की मानें तो एस. जयशंकर के भाषण में पांच विषय छाए रह सकते हैं -
काउंटर-टेररिज़्म, पीसकीपिंग, बदलती वैश्विक व्यवस्था, क्लाइमेट एक्शन और कोविड वैक्सीन तक समान पहुंच.

UNGA डिबेट के पहले दिन क्या हुआ?

20 सितंबर को पहला सत्र शुरू हुआ. सबसे पहले यूएन के सेक्रेटरी-जनरल अंतोनियो गुतेरेस ने भाषण दिया. उन्होंने दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं का खाका खींचा. गुतेरेस का फ़ोकस फ़ूड सिक्योरिटी, रूस-यूक्रेन युद्ध और क्लाइमेट चेंज पर था. उन्होंने अपनी हालिया पाकिस्तान यात्रा का भी ज़िक्र किया. गुतेरेस पाकिस्तान की बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे थे.
उन्होंने कहा,

जलवायु संकट नैतिक और आर्थिक अन्याय की केस स्टडी है. जी20 देश 80 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करते हैं, लेकिन इसका खामियाजा सबसे ग़रीब और सबसे कमज़ोर देशों को भुगतना पड़ता है.

गुतेरेस के भाषण के बाद UNGA के अध्यक्ष साबा कोरोसी ने शुरुआत की औपचारिक घोषणा कर दी. सबसे पहले नंबर पर ब्राज़ील ने मंच संभाला. इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है. ब्राज़ील पिछले सात दशकों से पहले नंबर पर बोलता आ रहा है. इसकी शुरुआत 1955 में हुई थी. उस समय अधिकतर देश पहले बोलने से हिचकते थे. तब ब्राज़ील ने आगे बढ़कर चुनौती संभाली थी. अमेरिका इस बैठक का मेज़बान होता है. इस नाते वो दूसरे नंबर पर संबोधन देता आया है. लेकिन इस बार ये परंपरा टूटी है. जो बाइडन ने सत्र के दूसरे दिन अपना संबोधन दिया.

पहले दिन चिली के राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक के भाषण ने ख़ूब सुर्खियां बटोरी. उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार को जनता के विरोध से डरना नहीं चाहिए. अपनी जनता से सीख लेनी चाहिए. हाल ही में चिली में नए संविधान को लेकर हुए जनमत-संग्रह में बोरिक को हार झेलनी पड़ी थी. खुलेआम उनको ट्रोल भी किया गया. बोरिक ने कहा कि हम जनता की राय को स्वीकार करते हैं. हम और बेहतर होने की कोशिश करेंगे.

20 सितंबर को फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का संबोधन भी हुआ. मैक्रों का संबोधन रूस-यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित था. इस दौरान उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ भी की. पीएम मोदी ने समरकंद में पुतिन को कहा था कि ये ज़माना युद्ध का नहीं है. मैक्रों ने अपने भाषण में इस बात का ज़िक्र किया. बोले, पीएम मोदी ने जो कहा था, वो बिलकुल सही था. यही समय की ज़रूरत है.

21 सितंबर को सत्र के दूसरे दिन अफ़ग़ानिस्तान की गर्ल्स रोबोटिक्स टीम की कप्तान सोमैया फ़ारुक़ी अपनी बात रखते हुए भावुक हो गईं. फ़ारुक़ी ने कहा कि दुनियाभर के नेताओं को सामने आकर अफ़ग़ान लड़कियों की रक्षा करनी चाहिए. तालिबान के क़ब्ज़े के बाद फ़ारुक़ी को अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर भागना पड़ा था.

जैसे-जैसे UNGA का सत्र आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे गर्माहट और विविधता बढ़ेगी. UNGA का मंच काग़ज़ी तौर पर इसी मकसद की बात करता है. लेकिन इसकी आलोचना इस बात को लेकर होती है कि ये काग़ज़ी दावे धरातल पर नहीं उतर पाते. क्या UNGA अपनी छवि को बदल पाएगा, ये देखने वाली बात होगी.


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