बागेश्वर धाम वाले बाबा का सच क्या है? क्या-क्या करतूतें की हैं?

03:35 PM Jan 24, 2023 | सोम शेखर
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मध्य प्रदेश के छतरपुर में बागेश्वरधाम (Bagheshwar Dham) है. धाम के पीठाधीश्वर हैं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Shastri). आए दिन सोशल मीडिया पर उनके विवादित बयान वायरल होते हैं. पहले उनका बयान पढ़िए,

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"जो तुम्हारे घर पर पत्थर फेंके, उसके घर JCB लेकर चलो, क्योंकि भारत सनातनियों का है. अगर सनातनियों के देश में राम की यात्रा पर रामनवमी पर कोई पत्थर मारे... बुजदिलों, कायरों जग जाओ. सब हिंदुओं अपने हाथ में हथियार उठा लो और कह दो हम सब हिंदू एक हैं."

अप्रैल 2022 में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने ये कहा था. इसमें धीरेंद्र शास्त्री हिंदू समुदाय के लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. आक्रामक भाषा शैली में हिंदुओं से बुलडोज़र ख़रीदने को बोल रहे हैं. हथियार उठाने को कह रहे हैं. और, भी बहुत कुछ बोले हैं. पहले वो सुन लीजिए-

ये कथावाचक हैं. जगह-जगह जा कर राम कथा कहते हैं. ऐसा उनका कहना है. 

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगा-पीछा क्या है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म 15 जुलाई 1996 को हुआ था. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बड़ी संख्या में भक्त हैं, जो दावा करते हैं कि धीरेंद्र किसी भी व्यक्ति की समस्या को उससे बिना पूछे कागज पर लिख देते हैं और बिना बताए ही लोगों के मन की बात भी जान लेते हैं.

आजतक से जुड़े लोकेश चौरसिया की रिपोर्ट के मुताबिक, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कथावाचन में कम उम्र में ही काफी फेमस हो गए थे. इनके दादा पंडित सेतुलाल गर्ग भी कथावाचक थे. दीक्षा अपने बाबा से ही ली. ये कथावाचन से ज़्यादा ‘झाड़-फूंक’ की वजह से फेमस हैं. 'BS मीडिया' के नाम से खुद का यूट्यूब चैनल भी है. छतरपुर के ही गड़ा गांव में ‘चमत्कारी दिव्य दरबार’ नाम से इनका दरबार लगता है. पहले ये दरबार केवल मंगलवार और शनिवार को लगता था, लेकिन अब जब भी धीरेंद्र कृष्ण गांव में रहते हैं, तो हर रोज़ लगता है. इसी दरबार को लेकर हालिया विवाद भी हुआ है. धीरेंद्र शास्त्री पर कथा के नाम पर ‘अंधविश्वास’ और 'जादू-टोना' फैलाने के आरोप लगे हैं.

'टोना' करते हैं पीठाधीश्वर?

दरअसल, रामकथा के साथ धीरेंद्र शास्त्री 'दिव्य चमत्कारी दरबार' लगाते हैं. मानने वाले बहुत महिमामंडन करते हैं. ऐसी ही एक 'श्रीराम चरित्र-चर्चा' महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित हुई थी. तय तो था कि ये कथा 13 जनवरी तक चलेगी, लेकिन कार्यक्रम दो दिन पहले यानी 11 जनवरी को ही संपन्न हो गई. क्यों? क्योंकि नागपुर की अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति ने आरोप लगाए कि 'दिव्य दरबार' और 'प्रेत दरबार' की आड़ में धीरेंद्र शास्त्री 'जादू-टोना' करते हैं. देव-धर्म के नाम पर आम लोगों को लूटने, धोखाधड़ी और शोषण भी किया जा रहा है. समिति ने पुलिस से मांग भी की है कि धीरेंद्र शास्त्री पर कार्रवाई हो. इस वजह से धीरेंद्र को कार्यक्रम छोड़कर भागना पड़ा.

हालांकि, धीरेंद्र ने नागपुर से कथा छोड़कर भागने पर सफ़ाई दी. स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके गुरु जी के जन्मदिन की वजह से सभी जगहों की कथा से 2-2 दिन कम कर दिए गए हैं. इसीलिए नागपुर की कथा से भी दो दिन कम की गई. विरोध करने वालों को 'सनातन धर्म विरोधियों' तक कह दिया. बागेश्वर धाम ने एक बयान में ये भी कहा है, 'हाथी चले बाज़ार, कुत्ता भौंके हज़ार'.

छुआछूत के आरोप!

26 मई 2022 को अख़बारों में ख़बरछपी थी. धीरेंद्र शास्त्री के एक वीडियो की ही बात थी. जीवन नाम का एक शख़्स नाम पुकारे जाने पर मंच के क़रीब आता है. और, धीरेंद्र शास्त्री के पैर छूने की कोशिश करता है. और तब धीरेंद्र शास्त्री कहते हैं,

''बस-बस हमें छूना मत, अछूत आदमी हैं हम!"

थोड़ी ही देर में धीरेंद्र शास्त्री के एक सहयोगी आते हैं और जीवन को शास्त्री से थोड़ा दूर करते हैं. ये वीडियो वायरल हुआ और कई लोगों ने इसे छुआछूत की प्रैक्टिस बताकर आलोचना की. जब बवाल हुआ, तो 27 मई 2022 को बागेश्वर धाम सरकार (ऑफिशियल) नाम से चलने वाले ट्विटर हैंडल पर सफ़ाई भी आई. इसमें लिखा गया कि एडिटेड वीडियो को डालकर भ्रामक प्रचार किया गया. अछूत कहकर धीरेंद्र शास्त्री ने ख़ुद को ही संबोधित किया था.

भारत के संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत छुआछूत प्रतिबंधित है. प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स ऐक्ट (1955) के सेक्शन-7 के अनुसार, दो साल की जेल, जुर्माने या दोनों का प्रावधान है.

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