2000 के जो नोट आप जमा कर रहे, उनका क्या होगा? छपने में लगा पैसा जान छटपटा जाएंगे!

08:43 PM May 22, 2023 | साकेत आनंद
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जब से RBI ने ये ऐलान किया कि 2000 के नोट सर्कुलेशन से बाहर हो जाएंगे, तब से लोगों के मन में ढेरों सवाल उठ रहे हैं. पहला तो यही है कि जिनके पास 2000 के नोट हैं वो कब तक बदल पाएंगे, कितने नोट बदल पाएंगे, कैसे बदल पाएंगे आदि. इन सबका जवाब RBI ने बता दिया है. यही कि 30 सितंबर तक आप बैंक में जाकर नोट एक्सचेंज कर सकते हैं. ये नोट तब तक वैध रहेंगे. हालांकि आरबीआई ने ये नहीं कहा कि इस तारीख के बाद ये अवैध हो जाएंगे. लेकिन बैंकों से कहा गया कि वे 2000 के नोट तत्काल प्रभाव से जारी करना बंद कर दें. एक सवाल और आया कि सरकार करोड़ों रुपये लगाकर नोट छापती है, तो वापस लेने पर इन नोटों का होता क्या है? क्या आपके मन में ये सवाल आया है?

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नोटों की छपाई की लागत

सबसे पहले जानते हैं नोटों को छापने में पैसा कितना लगता है. इंडिया टुडे को अगस्त 2018 में RTI के जरिये सरकार से जानकारी मिली थी. तब बताया गया था कि 2000 के एक नोट छापने पर सरकार 4 रुपये 18 पैसे खर्च करती है. वहीं 500 के नोट छापने में 2 रुपये 57 पैसे और 100 के नोट छापने में एक रुपया 51 पैसे का खर्चा आता है.

इसी RTI में एक और जानकारी मिली थी. पुराने 500 के नोट को छापने में 3 रुपये 9 पैसे का खर्च आता था. यानी नए वाले नोटों की तुलना में 52 पैसे ज्यादा खर्च होते थे. इसी तरह पुराने 1000 के नोटों की छपाई में 3 रुपये 54 पैसे की लागत आती थी. 2000 के नोट की छपाई से तुलना करें, तो पुराना नोट 64 पैसे सस्ता छप जाता था.

RBI ने 19 मई की प्रेस रिलीज में बताया था कि मार्च 2018 के दौरान कुल 6 लाख 73 हजार करोड़ रुपये के 2000 नोट मार्केट में मौजूद थे. ये पीक था. मार्केट सर्कुलेशन में तब 2000 के नोटों की हिस्सेदारी 37.3 फीसदी थी. इस हिसाब से देखें तो तब कुल 336 करोड़ 50 लाख नोट मार्केट में थे. अगर छपाई की लागत 4 रुपये 18 पैसे से गुना करें तो 2000 के नोटों की छपाई में कुल लागत 1406 करोड़ की आई थी. ये आंकड़ा 31 मार्च 2018 तक का है.

पिछले साल नवंबर में एक RTI से जानकारी मिली थी कि साल 2018-19 में सिर्फ साढ़े 4 करोड़ रुपये के नोट छापे गए थे. इसके बाद 2000 के नोटों की छपाई बंद हो गई. जब कुल लागत जोड़ रहे हैं तो इसको भी जोड़ लीजिये. ये कुल 20 हजार नोट हुए और इसकी छपाई लागत हुई 83 हजार 600 रुपये.

वापस ले लिए गए नोटों का होता क्या है?

ये पहली बार नहीं है जब नोट सर्कुलेशन से बाहर हो रहे हैं. RBI ने सबसे पहले साल 1946 में यह काम किया था. तब 500, 1000 और 10 हजार के नोटों को बंद किया गया था. इसके बाद 1978 में इसी तरह का फैसला लिया गया. 1000, 5 हजार और 10 हजार के नोटों को बाहर किया गया. फिर 2014 में अलग तरीके से नोटों को सर्कुलेशन से बाहर किया गया. RBI ने 2005 से पहले छपे हुए नोटों को मार्केट से निकाल दिया. और इसके बाद, नवंबर 2016 की नोटबंदी आप सबको याद होगी.

अब सवाल यह है कि मार्केट से बाहर हुए नोटों का क्या होता है? इसका एक जवाब तो सीधा है कि ये नोट बेकार हो जाते हैं. कागज के टुकड़े हो जाते हैं. ये नोट पहले RBI के ऑफिस में जमा किये जाते हैं. RBI के अलग-अलग रीजनल ऑफिस में. पहले इन नोटों को जला दिया जाता था. लेकिन पिछली बार कुछ अलग हुआ. पहले RBI ने इन नोटों को मशीनों से रद्दी कर दिया, फिर जमा हुए सैकड़ों टन रद्दी को रिसाइकल करने वाली कंपनी को बेच दिया.

2016 में नोटबंदी के बाद RBI ने नोटों की रद्दी को केरल की एक कंपनी को बेचा था. कंपनी का नाम है- वेस्टर्न इंडिया प्लायवुड लिमिटेड. यह हार्डबोर्ड बनाने वाली कंपनी है. हार्डबोर्ड बनाने में लकड़ी की लुगदी के साथ नोटों की रद्दी को मिलाया जाता था. कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पीके मोहम्मद ने तब NDTV से कहा था, 

"शुरुआत में यह आसान नहीं था. नोटों की लुगदी काफी कड़ी होती है और ये आसानी से रीसायकल नहीं होता है. लेकिन हमारे इंजीनियर्स ने रिसर्च के बाद हल ढूंढ निकाला. जिसके बाद हमने इस्तेमाल करना शुरू किया."

कंपनी की माने तो RBI के तिरुवनंतपुरम ब्रांच से उसे करीब 800 टन रद्दी मिले थे. कंपनी ने इसे 200 रुपये प्रति टन के हिसाब से खरीदा था. कंपनी अपने हार्डबोर्ड को अफ्रीकी और खाड़ी देशों में भी निर्यात करती है.

नवंबर 2016 में जब नोटबंदी हुई थी, तब 500 और 1000 रुपये के 15 लाख 41 हजार करोड़ रुपये सर्कुलेशन में थे. नोटों की संख्या के हिसाब से देखें तो करीब 2300 करोड़ नोट थे. करीब दो साल बाद RBI ने बताया था कि इनमें से 99.3 फीसदी नोट वापस आ गए. यानी सिर्फ 10 हजार 720 करोड़ रुपये के नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस नहीं आए थे.

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